मारपीट, धमकी, जबरन समझौता और पुलिस पर दबाव के आरोप: पीड़ित परिवार ने निष्पक्ष जांच की उठाई मांग
मारपीट, धमकी, जबरन समझौता और पुलिस पर दबाव के आरोप: पीड़ित परिवार ने निष्पक्ष जांच की उठाई मांग
मुजफ्फरनगर। जनपद के थाना भोपा क्षेत्र के ग्राम सिताबपुरी में जमीन के रास्ते के विवाद से शुरू हुआ मामला अब मारपीट, जान से मारने की धमकी, सोशल मीडिया पर कथित बदनाम करने, एआई से फर्जी फोटो बनाने की धमकी तथा पुलिस पर दबाव डालकर समझौता कराने के गंभीर आरोपों तक पहुंच गया है। पीड़ित परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है।
पीड़ित पक्ष के अनुसार, पहले से खेत तक आने-जाने के रास्ते को लेकर विवाद चल रहा था। इस संबंध में कई बार शिकायतें भी दी गई थीं। आरोप है कि 3 जुलाई 2026 को सुधीर पर अंकित, सोनू, निर्मला, सुभाष और दिलीप सहित अन्य लोगों ने लाठी, डंडे और लोहे की रॉड से हमला कर दिया। बीच-बचाव करने पहुंचीं उसकी मां कुसुम के साथ भी मारपीट की गई, जिससे दोनों घायल हो गए।
परिजनों का कहना है कि घटना के बाद 112 पर सूचना दी गई थी और घायलों को पहले सरकारी अस्पताल तथा बाद में केदार हॉस्पिटल में उपचार के लिए ले जाया गया। उनका आरोप है कि कमर और रीढ़ की हड्डी पर गंभीर चोटें आईं, लेकिन मामले में गंभीर धाराएं नहीं लगाई गईं।
इसी परिवार की सदस्य विशाली ने भी आरोप लगाया है कि सोनू और विशाल ने इंस्टाग्राम पर उसकी फोटो लगाकर अश्लील टिप्पणी की, बदनाम करने की कोशिश की तथा एआई के माध्यम से फर्जी फोटो बनाकर वायरल करने और उसके पति की हत्या कराने तक की धमकी दी। इस संबंध में भी पुलिस को लिखित शिकायत दी गई थी।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि शिकायत योगी हेल्पलाइन पर भी दर्ज कराई गई थी, लेकिन बाद में पुलिस ने उनके पिता पर दबाव बनाकर समझौता करा दिया। परिवार का कहना है कि शिकायतकर्ता और विशाली दोनों समझौते के समय मौजूद नहीं थे तथा उनके हस्ताक्षर भी नहीं हैं। उनका दावा है कि समझौता उनकी इच्छा के विरुद्ध कराया गया।
परिजनों ने यह भी कहा कि थाने में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, 112 टीम द्वारा तैयार की गई वीडियो रिकॉर्डिंग तथा अस्पताल के मेडिकल रिकॉर्ड पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने ला सकते हैं। उन्होंने इन सभी साक्ष्यों को सुरक्षित रखते हुए निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
पीड़ित परिवार ने उच्च अधिकारियों से मांग की है कि पूरे प्रकरण की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए, यदि किसी स्तर पर लापरवाही या दबाव डालकर कार्रवाई करने के आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध भी विधिक कार्रवाई की जाए। साथ ही मारपीट, धमकी, सोशल मीडिया पर कथित बदनाम करने और जबरन समझौता कराने के आरोपों की भी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
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