पन्ना मध्य प्रदेश: स्वास्थ्य केन्द्र नरदहा का वर्षों से नहीं खुला ताला

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Mar 11, 2026 - 17:11
Mar 11, 2026 - 17:11
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पन्ना मध्य प्रदेश: स्वास्थ्य केन्द्र नरदहा का वर्षों से नहीं खुला ताला
पन्ना मध्य प्रदेश: स्वास्थ्य केन्द्र नरदहा का वर्षों से नहीं खुला ताला

पन्ना मध्य प्रदेश: 

प्राथमिक स्तर पर जनमानस को समुचित उपचार मुहैया कराने के प्रयासों के बीच जिले के ग्रामीण अंचल के सरकारी स्वास्थ्य सेवायें बीमार पड़ी है। जिले के आदिवासी बाहुल्य सुदूर पठारी क्षेत्र कल्दा पठार का ष्यामगिरी हो या फिर दूसरे छोर पर उत्तर प्रदेश की सीमा पर स्थित नरदहा, इन दोनों ही गां

वों में स्थित उप स्वास्थ्य केन्द्र का वर्षों से ताला तक नहीं खुला। स्टार समाचार बन्ना

स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली का सबूत है। श्यामगिरी की तरह नरदहा में भी क्षेत्रवासी सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के लाभ से पूर्णतः वंचित है। इस इलाके के लोग बीमार पड़ने पर स्थानीय झोलछाप डॉक्टरों की शरण में जाते है अथवा उत्तर प्रदेश के नरैनी कस्बा जाकर अपना इलाज कराने को मजबूर है। जिले के अजयगढ़ विकासखण्ड अंतर्गत आने वाला सीमावर्ती ग्राम नरदहा के उप स्वास्थ्य केन्द्र में पदस्थ एएनएम अनीता आरख और एमपीडब्ल्यू राजकुमार कोरी मुख्यालय में निवास न कर क्रमशः अजयगढ़ और देवेन्द्रनगर में रहते है। ग्रामीणों की मानें तो दोनों ही स्वास्थ्य कार्यकर्ता महीने में सिर्फ दो-चार दिन टीकाकरण करने आते है। इसमें भी वे शाम

नरदहा निवासी स्वामीदीन खटिक, वंशपति खटिक, रामखिलावन अहिरवार ने बताया कि गांव में स्वास्थ्य केन्द्र स्थापित होने के बावजूद क्षेत्रवासियों को इससे कोई लाभ नहीं है। वहां पदस्थ स्वास्थ्यकर्मियों को मुख्यालय में निवास न करने और कई सालों से स्वास्थ्य केन्द्र न खुलने से ग्रामवासियों का अपातकालीन स्थिति में प्राथमिक उपचार तक नसीब नहीं हो पाता। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित होने की पीड़ा सबसे ज्यादा उस समय होती है जब छोटे बच्चे महिलायें अथवा वृद्ध ऐसे समय बीमार पड़ते है कि जल्दी उन्हें उपचार समुचित उपचार के लिए उत्तरप्रदेश के नरैनी अथवा बांदा ले जाना संभव नहीं हो पाता। साधन सुविधा जुटाने में समय लगने के कारण कई बार बीमार व्यक्ति की हालत और अधिक बिगड़ जाती है। क्षेत्र में कई परिवार ऐसे है जोकि अपने बीमार परिजनों को समुचित प्राथमिक उपचार न मिलने के आभाव में असमय ही खो चुके है। इन परिस्थितियों में सुदूर सीमावर्ती क्षेत्रवासियों के लिए सरकारी स्वास्थ्य सेवायें बेमानी साबित हो रही है। कई सालों से उप स्वास्थ्य केन्द्र के न खुलने तथा स्वास्थ्य कार्यकर्ता के मुख्यालय में निवास न करने से विकासखण्ड और जिले में बैठे स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की मॉनीटरिंग पर प्रश्न चिन्ह लग रहा है। लगता है कि मैदानी स्वास्थ्य कर्मियों की तरह विभागीय अधिकारी भी कागजों पर स्वास्थ्य कार्यक्रमों क्रियान्वयन की प्रगति के साथ-साथ निरीक्षण की झूठी रिपोर्ट भेजकर पीर्शपरिसर में फैली गंदगी को दिखाते ग्रामीण अधिकारियों को गुमराह कर रहे है।

मवेशियों की गंदगी से पटा परिसर

उप स्वास्थ्य केन्द्र भवन नरदहा के कई सालों से न खुलने के कारण पूरा परिसर कटीली झाड़ियों-खरपतवार, मवेशियों के मल-मूत्र से पटा पड़ा है। स्थिति यह है कि स्वास्थ्य केन्द्र तक पहुंचने के लिए आवागमन की सुगम व्यवस्था तक नहीं है। कर्तव्य के निर्वहन को लेकर स्थानीय स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की घोर लापरवाही के चलते स्वास्थ्य केन्द्र के आजूबाजू में रहने वाले लोग परिसर में अपना निस्तार करने लगे है। ग्रामीण रघुनंदन कुशवाहा, रामकरण खटिक व नथिया बाई अहिरवार ने बताया कि जब से स्वास्थ्य केन्द्र भवन निर्माण के बाद से ही बंद पड़ा है। वहां पर आज तक किसी को न तो कभी इंजेक्शन लगाया गया और न ही किसी का इलाज किया गया। 

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